Thursday, October 08, 2015

दिसंबर तक सिंहस्थ के सभी कार्य पूरे होंगे

सिंहस्थ 2016 (15) 

जैसे-जैसे सिंहस्थ 2016 की तिथि नजदीक आ रही है। प्रशासनिक अमले में तेजी बढ़ती जा रही है। मुख्य सचिव एंटोनी डिसा ने राज्य सरकार के सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को साफ-साफ कहा है कि सिंहस्थ के काम में कोई भी ठिलाई बर्दाश्त के बाहर होगी। सरकार का लक्ष्य है कि सभी काम दिसंबर तक पूरे कर लिए जाए। इन कार्यों में राज्य सरकार के अलावा नगरीय प्रशासन भी पूरी मुस्तैदी से लगा हुआ है। अन्य विभागों से ही समन्वय बनाकर काम किया जा रहा है। जो कार्य मुख्य रूप से किए जा रहे है, उनमें जल संसाधन विभाग, नगरीय प्रशासन विभाग, लोक निर्माण, लोक निर्माण अभियांत्रिकी और स्वास्थ्य तथा संस्कृति विभाग की गतिविधियां मुख्य है। मुख्य सचिव खुद कार्यों की समीक्षा और निगरानी में लगे हुए थे। अधिकारियों से कहा गया है कि अगर उन्हें काम में कोई भी दिक्कत आ रही हो, तो सूचित करें, ताकि उन्हें दूर किया जा सके। 



मध्यप्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों की हालात यह है कि सरकार ने उन्हें जो पैसा दिया है वह भी खर्च नहीं हो पा रहा है। सिंहस्थ के लिए अब तक 2400 करोड़ रुपए से ज्यादा मंजूर हो चुके है। इनमें से एक हजार करोड़ रुपए अलग-अलग विभागों को खर्च करना है, लेकिन इस एक हजार करोड़ में से अभी तक केवल 600 करोड़ ही खर्च हो पाए है। सबसे कम खर्च लोक निर्माण विभाग कर पाया है। इसका अर्थ यह हुआ कि लोक निर्माण विभाग को जितने कार्य करने थे वे पूरे नहीं हो पाए है। अब यह हाल है कि दिसंबर तक लोक निर्माण विभाग को रोजाना करीब 3 करोड़ रुपए के कार्य कराने है। 

इसके अलावा अन्य निर्माण कार्यों को भी संभागायुक्त ने मंजूरी दी है। 61 लाख रुपए की लागत से अग्निशमन की सामग्री खरीदी जा रही है। नगर निगम 7-7 लाख रुपए की मोटरसाइकिल आधारित दमकलें खरीदेगा। ये दमकलें छोटी गलियों में भी जा सकेंगी और आग लगने की स्थिति में अग्निशमन कर सकेंगी। जल संसाधन विभाग को एक करोड़ 42 लाख रुपए के चार कार्य और करने है, जिसकी मंजूरी मिल गई है। पर्यटन विकास निगम को मेगा सर्किट में काम पूरे करने के लिए 86 लाख रुपए दिए गए है। राणाजी की छत्रि पर एक अस्थायी कंट्रोल रूम भी बनाया जाएगा, इसके लिए 1 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। नर्मदा-क्षिप्रा लिंक के अंतर्गत मार्ग में पड़ने वाले 11 कल्वर्ट के लिए भी करीब सवा दो करोड़ रुपए मंजूर किए गए है। 




सिंहस्थ क्षेत्र में सेटेलाइट टाऊन और झोन में करीब 1500 दुकानें खोली जाएगी। इन दुकानों का आकार 11 वर्गफीट से लेकर 400 वर्गफीट तक का होगा। न्यूनतम 20 रुपए प्रति वर्ग फुट शुल्क दुकानदारों से लिया जाएगा। इसके लिए भी आवेदन मंगाए जा रहे है। मेले में पान, बीढ़ी, गुटखा, मांंस, मछली, मदिरा आदि के लिए कोई भी दुकान नहीं दी जाएगी। सभी पैदल मार्गों पर अस्थायी मिल्क पार्लर खोले जाएंगे। मध्यप्रदेश दुग्ध उत्पाद संघ के सांची ब्रांड के सभी उत्पाद यहां मिलेंगे। खाद्य आपूर्ति निगम साधु-संतों के डेरों के अस्थायी राशन कार्ड भी बनाएगा। 

मध्यप्रदेश सरकार ने सिंहस्थ की ब्रांडिंग के लिए तरह-तरह के उपाय शुरू किए है। इनमें अंतरराष्ट्रीय विमान टिकटों में टिकट के ऊपर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का सिंहस्थ आमंत्रण पत्र भी मुद्रित है। इस कारण अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वाले लोगों को सिंहस्थ की जानकारी भी स्वत: ही मिल जाती है। महाप्रभु संप्रदाय के श्री वल्लभराय जी महाराज ने इस व्यवस्था पर संतोष प्रकट किया है। श्री वल्लभ संप्रदाय के संत इस बार निर्मोही अखाड़े के संतों के साथ क्षिप्रा स्नान करने वाले है।

--प्रकाश हिन्दुस्तानी


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