Thursday, October 08, 2015

सिंहस्थ में होगी 12 वर्षों से चल रहे महामृत्युंजय यज्ञ की पूर्णाहुति

सिंहस्थ 2016 (16) 


22 अप्रैल से 21 मई 2016 तक आयोजित होने वाले सिंहस्थ 2016 महाकुंभ में इस बार एक अनोखा कार्य होने वाला है। वह कार्य है संत मौनी बाबा के आश्रम में 11 साल पहले शुरू हुए महामृत्युंजय यज्ञ की पूर्णाहुति का। यह यज्ञ विगत सिंहस्थ में प्रारंभ हुआ था और 11 वर्ष से लगातार जारी है। श्री गंगाघाट पर स्थिर मौनी बाबा आश्रम में यज्ञ के साथ-साथ अनुष्ठानों का सिलसिला भी जारी है। यह अनुष्ठान और यज्ञ मौनी बाबा के शिष्य संत शुभम भाई के मार्गदर्शन में संचालित हो रहे है। 


सिंहस्थ 2016 मेंं ही पुराने यज्ञ की पूर्णाहुति के साथ फिर से महामृत्युंजय यज्ञ की स्थापना की जाएगी और यह यज्ञ भी 12 वर्षोें तक अखंड रूप से संचालित किया जाता रहेगा। इस यज्ञ की पूर्णाहुति सन् 2028 में होने वाले सिंहस्थ के दौरान की जाएगी। इन दोनों आयोजनों में संत श्री मौनी बाबा के दुनियाभर में फैले लाखों भक्त उपस्थित होंगे। पचास से अधिक देशों में मौनी बाबा के भक्त है, जो सिंगापुर, इंडोनेशिया, अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, नार्वे आदि देशों में रहते है। इन विदेशी मेहमानों के लिए भी सिंहस्थ में आवास और भोजन की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए गंगाघाट पर टेन्ट लगाए जाएंगे। मौनी बाबा के भक्त इन व्यवस्थाओं को जुटाने में लगे है। 

श्री मौनी बाबा के गंगाघाट स्थित आश्रम में 12 महीने अन्य क्षेत्र संचालित होता रहता है। यहां श्रद्धालु प्रवचनों के अलावा श्रीराम कथा का भी श्रवण सुन सकेंगे। यह राम कथा श्री सुमन भाई स्वयं करते है। इसके अलावा सिंहस्थ के दौरान अनेकानेक सांस्कृतिक गतिविधियां भी संचालित होती है। 

अनेक सिंहस्थ और कुंभ मेलों में उपस्थित रह चुके अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्री महंत नरेन्द्र गिरी जी महाराज मानते है कि अगर सिंहस्थ में 4 व्यवस्थाएं अच्छी हुई, तो सिंहस्थ को सफल कहा जा सकेगा। यह 4 व्यवस्थाएं सरकार और प्रशासन को मिलकर करनी है। श्री महंत महाराज का मानना है कि अगर मेले में यातायात की व्यवस्था सुचारू रहे, शुद्ध पेयजल सभी को आसानी से मिल जाए, सफाई व्यवस्था का पूरा ध्यान रखा जाए और क्षिप्रा नदी में शुद्ध जल का प्रवाह होता रहे तो सिंहस्थ की सफलता निश्चित है। 



श्री महंत नरेन्द्र गिरी जी महाराज मानते है कि सिंहस्थ में करोड़ों लोग आने वाले है। ऐसे में मेला क्षेत्र से वाहनों की पार्किंग बहुत दूर की जाती है। ऐसे में अगर श्रद्धालुओं को लोक परिवहन व्यवस्था सुचारू रूप से मिले, तो उन्हें कम से कम पैदल चलना पड़ेगा। इलाहाबाद कुंभ में यहीं व्यवस्था की गई थी। सिंहस्थ में आने वालों में बड़ी संख्या में बुजुर्ग लोग भी होते है, जो पैदल चलकर लंबी दूरी तय नहीं कर सकते। व्हीलचेयर पर भी बड़ी संख्या में लोग होते है, उनकी सुविधा का ध्यान रखा जाना जरूरी है। 

गरमी के मौसम में सिंहस्थ होने के कारण श्रद्धालुओं को बार-बार पेयजल की आवश्यकता पड़ेगी। उन्हें शुद्ध पानी उपलब्ध कराना एक बहुत बड़ी आवश्यकता है। यह पानी शुद्ध और नि:शुल्क हो और आसानी से सभी को उपलब्ध हो। सिंहस्थ के मौके पर पेयजल बेचने का धंधा नहीं होना चाहिए। सभी श्रद्धालु पेयजल खरीदने की स्थिति में भी नहीं होते है। 


सिंहस्थ में आने वाले करोड़ों लोगों द्वारा उत्सर्जित मलमूत्र का उचित निपटान भी अनिवार्य है वरना महामारी फैल सकती है। इतना बड़ी संख्या में आने वाले लोगों को खाने और पीने के लिए शुद्ध भोजन, पानी का मिलना आवश्यक है। गर्मी के कारण खाद्य पदार्थ जल्दी खराब हो सकते है, इसलिए सिंहस्थ के आयोजकों के लिए यह एक बड़ी चुनौती होगी। 

सिंहस्थ की कामयाबी इस बात पर निर्भर है कि क्षिप्रा नदी में शुद्ध पानी का प्रवाह सतत् बना रहे। गंदे नालों का पानी क्षिप्रा में न मिल सके। बैराज बनाकर पानी की व्यवस्था की जा सकती है। साधु-संत क्षिप्रा नदी की वर्तमान स्थिति से पहले ही नाराज है। अगर वे सिंहस्थ के अवसर पर स्नान नहीं करेंगे या धरना प्रदर्शन करेंगे, तो प्रशासन के लिए यह डूब मरने वाली बात होगी। 

--प्रकाश हिन्दुस्तानी


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